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कोरोना काल में इन पांच कारणों से बढ़ी भारत की विदेशी दौलत, आखिर क्या है इसका राज

नई दिल्ली। दुनिया की किसी भी इकोनॉमी में विदेशी मुद्रा भंडार एक अहम स्थान होता है। इस दौलत से किसी भी देश को विदेशों से सामान मंगाने में काफी आसानी होती है। साथ ही आप अच्छी इकोनॉमी में गिने जाते हैं। अगर बात भारत की करें तो मौजूदा समय में विदेशी मुद्रा भंडार अपने चरम पर है। वो भी तब जब देश कोरोना वायरस के मामले में दूसरे नंबर है। जीडीपी के आंकड़े माइनस में है। ताजा आंकड़ों के अनुसार देश के पास मौजूदा समय में 575 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। जिसमें लगातार दो महीनों से इजाफा हो रहा है, लेकिन इसकी शुरुआत जून से ही शुरू हो गई थी, जब देश के इस भंडार ने 500 अरब डॉलर का आंकड़ा छुआ था। खास बात तो ये है कि मौजूदा वित्त वर्ष में यह इजाफा 163 बिलियन डॉलर का हो चुका है। सवाल ये है कि आखिर ऐसे कौन से कारण हैं, जिनकी वजह से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कोरोना काल में आसमान पर पहुंच गया। आइए आपको भी बताते हैं।

पहले बात करते हैं विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़ों की
- देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार आठवें सप्ताह तेजी दर्ज की गई।
- 20 नवंबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 2.52 अरब डॉलर बढ़कर रिकॉर्ड 575.29 अरब डॉलर हो गया।
- मौजूदा वित्त वर्ष में विदेशी मुद्रा भंडार में 163 अरब डॉलर का इजाफा हो चुका है।
- जून के महीने में विदेशी मुद्रा भंडार 500 अरब डॉलर के पार कर दुनिया में तीसरे नंबर पहुंचा था।
- विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 2.83 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 533.10 अरब डॉलर पर पहुंचा।
- स्वर्ण भंडार हालांकि 33.90 करोड़ डॉलर घटकर 36.01 अरब डॉलर हो गया।
- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास आरक्षित निधि 1.90 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.68 अरब डॉलर हो गई।
- विशेष आहरण अधिकार 40 लाख डॉलर बढ़कर 1.49 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

अक्टूबर से लगातार हो रहा है विदेश मुद्रा भंडार में इजाफा

समाप्त सप्ताह की तारीख इजाफा ( अरब डॉलर में ) कुल विदेशी मुद्रा भंडार ( अरब डॉलर में )
20 नवंबर 2.52 575.29
13 नवंबर 4.28 572.77
06 नवंबर 8 568.49
30 अक्टूबर 18.3 560.71
23 अक्टूबर 5.41 560.53
16 अक्टूबर 3.61 555.12
09 अक्टूबर 5.87 551.51
02 अक्टूबर 3.62 545.64

इन कारणों से बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार
सवाल ये है कि आखिर देश में कोरोना काल के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा कैसे? जब इस बारे में ऐनालिसिस किया गया तो समझ आया कि लॉकडाउन के बीच भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल, गोल्ड इंपोर्ट बिल, इडिबल इंपोर्ट बिल, मई से लेकर अब तक विदेशी निवेशकों का भारत में रुझान और सबसे अहम बात रिलायंस की विदेशियों कंपनियों के साथ करीब दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की डील जैसे कारण रहे जिन्होंने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को सपोर्ट किया।

1. भारत का कम हुआ क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल

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कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान भारत सहित पूरी दुनिया में क्रूड ऑयल की खपत कम हुई, जिसकी वजह से कोरोना काल में क्रूड ऑयल के दाम औसतन 30 से 40डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहे। जिसकी वजह से भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल काफी कम हो गया। जानकारों की मानें तो जब क्रूड ऑयल के दाम में एक डॉलर कम होता है तो भारत के क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल में 2900 करोड़ रुपए की कटौती हो जाती है। इस दौरान क्रूड ऑयल के दाम औसतन 50 फीसदी से ज्यादा कम हुए। ऑयल मिनिस्ट्री के प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल की रिपोर्ट की मानें तो भारत का इस साल का ऑयल इंपोर्ट बिल आधा रह सकता है।

2. गोल्ड इंपोर्ट बिल में भी गिरावट

Gold and silver

यह बात किसी से छिपी नहीं कि भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़े आयातक देशों में से एक है। इसके लिए भारत करोड़ों की विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करता है। लेकिन कोरोना काल में सोने के दाम में इजाफा, गोल्ड ज्वेलरी की डिमांड कम होना और गोल्ड इंवेस्टमेंट कम होने से भारत ने कम आयात किया। आंकड़ों की मानें तो वल्र्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार 1995 के बाद भारत में गोल्ड गोल्ड की डिमांड सबसे कम है। जिसकी वजह से अप्रैल के महीने में भारत का गोल्ड इंपोर्ट 50 किलो था, जबकि पिछले साल समान महीने में 101 टन से ज्यादा था। वैसे मौजूदा समय में गोल्ड इंपोर्ट में हल्का सुधार देखने को मिला है।

3. इडिबल ऑयल इंपोर्ट हुआ कम

Edible Oil

वहीं भारत सिर्फ क्रूड ऑयल और सोने का ही बाहर से आयात नहीं करता है, बल्कि खाने का तेल, जिसे इडिबल ऑयल कहते हैं उसका इंपोर्ट भी काफी होता है। लेकिन बीते 9 महीने से भारत द्वारा इसका आयात काफी कम कर रहा है। पहला कारण तो भारत सरकार द्वारा इस पर लगातार इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ी रही। वहीं लॉकडाउन के कारण भारत बाहर के देशों से कुछ नहीं मंगा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2020 में इडिबल ऑयल इंपोर्ट में 32 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली थी। जिसकी वजह से भी भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की बचत हुई है। वैसे बीते सप्ताह सरकार की ओर क्रूड पाल्म ऑयल से इंपोर्ट ड्यूटी को 10 फीसदी कम किया गया है।

4. विदेशी निवेशकों का बढ़ा रुझान

FPI

वहीं दूसरी ओर मौजूदा वित्त वर्ष में विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय शेयर बाजार में बढ़ा है। अगर बात नवंबर के महीने की करें तो 20 नवंबर तक विदेशी निवेशकों की ओर से 50 हजार करोड़ रुपए का विदेशी निवेश किया है। जिसने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने का प्रयास किया। वहीं दूसरी ओर मौजूदा वित्त वर्ष में विदेशी निवेशकों का 30.40 बिलियन डॉलर लग चुका है। जिसने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने का प्रयास किया है।

5. रिलायंस जियो और रिटेल डील भी बना अहम कारण

mukesh ambani

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में अहम योगदान जियो प्लेटफॉर्म्स और रिलायंस रिटेल में विदेशी निवेश का भी काफी हाथ रहा है। दोनों ही सब्सिडीयरीज में रिलायंस को 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा मिले हैं। जियो में जहां फेसबुक, सिल्वर लेक, केकेआर अटलांटिक, मुबाडला, विस्टा जैसी बड़ी कंपनियों ने हिस्सेदारी खरीदी है। वहीं रिटेल वेंचर में भी दुनिया की बड़ी कंपनियों की ओर से करीब 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा रुपाया लगाया है। जिसका असर भी विदेशी मुद्रा भंडार में देखने को मिला है।



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