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Goa Film Festival में क्षेत्रीय फिल्मों का दबदबा, पैनोरमा में हिन्दी की सिर्फ दो फीचर फिल्में

-दिनेश ठाकुर

कथ्य और प्रस्तुति के पैमाने पर हिन्दी के मुकाबले क्षेत्रीय भाषाओं में ज्यादा अच्छी फिल्में बन रही हैं। गोवा में अगले महीने होने वाले अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के लिए जो भारतीय फिल्में चुनी गई हैं, उससे इस तथ्य की फिर पुष्टि हुई है। दो दिन पहले समारोह की तारीख के ऐलान के बाद सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ( Prakash Javdekar ) ने भारतीय पैनोरमा की फिल्मों की सूची जारी की है। इस वर्ग की 20 फीचर फिल्मों में हिन्दी की सिर्फ दो फिल्में हैं- दुर्बा सहाय की 'आवर्तन' और तुषार हीरनंदानी की 'सांड की आंख ( Saand Ki Aankh Movie) ।' दोनों महिला प्रधान फिल्में हैं। 'आवर्तन' में एक शास्त्रीय नृत्यांगना की कहानी है, तो 'सांड की आंख' बागपत की बुजुर्ग शार्प शूटर प्रकाशी तोमर और चंद्रो तोमर (तापसी पन्नू, भूमि पेडनेकर) की बायोपिक है।

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सबसे ज्यादा चार फिल्में मलयालम की
भारतीय पैनोरमा में इस बार मलयालम और मराठी फिल्मों का दबदबा है। फिल्मकार जॉन मैथ्यू मथन की अगुवाई वाली ज्यूरी ने मलयालम की सबसे ज्यादा चार फिल्में चुनी हैं- प्रदीप कालीपुर्यथ की 'सेफ', अनवर रशीद की 'ट्रांस', निसाम बशीर की 'केट्टीयोलानु एंते मलखा' और एस. परावूर की 'थाहिरा।' मराठी में मंगेश जोशी की 'करखानीसंची वारी', शशांक उदापुरकर की 'प्रवास' और वैभव खिस्ती- एस. गोडबोले की 'जून' का चयन हुआ है। यथार्थपरक नई लहर की फिल्मों का सिलसिला हिन्दी में कई साल से कमजोर पड़ा हुआ है, लेकिन मलयालम और मराठी सिनेमा ने इस मशाल को बुझने नहीं दिया है। कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में इन दो भाषाओं की फिल्में भारत की नुमाइंदगी कर रही हैं। मलयालम की 'जलीकट्टू' और 'मूथॉन' पिछले साल टोरंटो समारोह में दिखाई गई थीं, जबकि 'चोला' को वेनिस समारोह की परिक्रमा का मौका मिला। अब ऑस्कर अवॉर्ड के लिए 'जलीकट्टू' भारत की नुमाइंदगी कर रही है।

मराठी सिनेमा भी आगे
चैतन्य तम्हाणे की मराठी फिल्म 'द डिसाइपल' इस साल वेनिस फिल्म समारोह के लिए चुनी गई, तो इसी भाषा की 'करखानीसंची वारी' टोक्यो समारोह में शिरकत कर चुकी है। चार साल पहले गोवा समारोह के भारतीय पैनोरमा में सात मराठी फिल्मों (इनमें तीन गैर-फीचर फिल्में थीं) से संकेत मिलने लगे थे कि नई लहर के सिनेमा की पताका या तो मराठी में फहरा रही है या मलयालम में। बहरहाल, गोवा समारोह के मुख्यधारा वर्ग के लिए जो तीन फिल्में चुनी गई हैं, उनमें हिन्दी की 'छिछोरे' शामिल है। बाकी दो फिल्मों में एक मलयालम (कापेला) और एक तमिल (असुरन) की है।

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गोविंद निहलानी की अंग्रेजी फिल्म से वापसी
एक अर्से बाद गोवा समारोह में फिल्मकार गोविंद निहलानी ( Govind Nihalani ) की कोई फिल्म देखने को मिलेगी। कभी 'आक्रोश', 'अर्धसत्य', 'द्रोहकाल' और 'हजार चौरासी की मां' बनाने वाले निहलानी ने 16 साल से कोई हिन्दी फिल्म नहीं बनाई है। उनकी पिछली फिल्म 'ती अणी इतर' (2107) मराठी में थी। अब उन्होंने अंग्रेजी में एनिमेशन फिल्म 'अप, अप एंड अप' बनाई है। पैनोरमा के लिए चुनी गईं गैर-फीचर (शॉर्ट) फिल्मों में जरूर हिन्दी की नुमाइंदगी ज्यादा है। हिन्दी की जो पांच शॉर्ट फिल्में दिखाई जाएंगी, उनमें अशमिता गुहा नियोगी की 'कैटडॉग', फराह खातून की 'होली राइट्स', शूरवीर त्यागी की 'जादू', प्रतीक गुप्ता की 'शांताबाई' और कामाख्या नारायण सिंह की 'जस्टिस डिलेड बट डिलीवर्ड' शामिल हैं।



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