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आत्मनिर्भर भारत पैकेज ने नया बिजनेस शुरू करने की चाह को बनाया आसान

नई दिल्ली. कोरोना महामारी और उससे उपजे हालातों ने वर्ष 2020 में देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया। इस दौरान लॉकडाउन के चलते अप्रेल और मई महीने में लगभग सभी तरह की गतिविधियां शून्य हो गई थीं। इस परिस्थिति ने घरों में कैद लोगों को नया करने के लिए प्रोत्साहित किया। लोग नए बिजनेस की ओर बढ़े और नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन में तेजी आई। 2020 में 2019 की तुलना में ज्यादा कंपनियां अस्तित्व में आईं।

2019 के दौरान 1.28 लाख नई कंपनियां अस्तित्व में आईं। 2020 में यह आंकड़ा 1.42 लाख पर पहुंच गया। 2020 में 11 फीसदी ज्यादा कंपनियों का रजिस्ट्रेशन हुआ। इस वृद्धि में खास योगदान केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा ने दिया। पैकेज घोषित होने से पहले 2020 में जनवरी से मई के दौरान 37010 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन हुआ। मई में पैकेज की घोषणा हुई। जून से दिसंबर के बीच, 1,04,989 कंपनियां रजिस्टर्ड हुईं।

गुजरात सबसे आगे-
नई कंपनियों में गुजरात देश में अव्वल रहा। वर्ष 2020 के दौरान गुजरात में 7324 नई कंपनियां पंजीकृत हुईं, जबकि 2019 में यहां 5784 कंपनियां पंजीकृत हुई थीं। देश में नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन की ग्रोथ 2020 में 11 प्रतिशत रही।

20 लाख करोड़ का पैकेज बना संजीवनी-
कोरोना काल में पस्त अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सरकार ने मई, 2020 में 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया। इसी के साथ कई तरह की पॉलिसी में सुधार भी किया। इसके चलते जून, 2020 से जब देशभर में विभिन्न चरणों में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई तो नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन में तेजी से उछाल आया। जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में हर महीने औसतन 16 हजार से ज्यादा नई कंपनियों का रजिस्ट्रेशन हुआ।

प्रमोटर्स का 7 हजार करोड़ का निवेश-
कॉरपोरेट मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में आई नई कंपनियों के लिए प्रमोटर्स ने करीब 7,000 करोड़ रुपए का निवेश किया। विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रमोटर्स नई कंपनियों के लिए औसतन 1 लाख से 20 लाख रुपए तक का निवेश करते हैं, जबकि मध्यम और बड़ी कंपनियों के लिए पेडअप कैपिटल 50 लाख से लेकर 25 करोड़ रुपए तक के बीच होता है। प्रमोटर्स के निवेश करने के बाद कंपनियों के संचालकों का हौसला बढ़ा है।



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