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तंबाकू उत्पाद के उपभोग के लिए सख्त कानून से ज्यादा जागरुकता की दरकार

नई दिल्ली । सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पादों पर कानून में किए जा रहे बदलाव में खुली सिगरेट की बिक्री पर रोक और सिगरेट पीने के लिए तय स्थान के प्रस्ताव से धूम्रपान करने वालों का बड़ा वर्ग सहमति नहीं रखता है। नॉन कॉमर्शियल एंटिटी प्रहार ने इसे लेकर दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, बेंगलूरु, कोलकाता, गुवाहाटी और वडोदरा सहित 14 शहरों में सर्वे किया है। इसमें 1,986 लोगों का साक्षात्कार किया गया। सर्वेक्षण में पाया गया कि 78 फीसदी उत्तरदाता तंबाकू के लिए उम्र की सीमा 18 वर्ष से 21 वर्ष बढ़ाने का समर्थन नहीं करते हैं।

आखिरकार बढ़ेगी खपत -
पब्लिक रेस्पॉन्स अगेंस्ट हेल्पलेसनेस एंड एक्शन फॉर रिड्रेसल (प्रहार) ने कहा कि सर्वेक्षण में 87 फीसदी प्रतिभागी खुली सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव का समर्थन नहीं करते हैं। उनका मानना है कि तंबाकू की खपत को कम करने के इस निर्णय से धूम्रपान करने वालों को पूरा पैक खरीदने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इससे हमेशा उनके हाथों में सिगरेट उपलब्ध होगी, जिससे आखिरकार खपत बढ़ेगी।

57 फीसदी लोग खरीदते हैं खुली सिगरेट-
सर्वेक्षण के अनुसार, 57 फीसदी उपभोक्ता खुली सिगरेट खरीदते हैं, क्योंकि यह उन्हें कम धूम्रपान करने में मदद करता है। केवल 19 फीसदी लोग ही कम पैसे के कारण यह विकल्प चुनते हैं। वहीं सात फीसदी उत्तरदाताओं ने महसूस किया कि खुली सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध से वह सिगरेट पीने से दूरी बना सकेंगे।

मकसद पूरा नहीं कर पाएगा कानून-
प्रहार के अध्यक्ष अभय राज मिश्रा ने कहा कि कोटपा कानून 2020 का प्रस्ताव ठीक नहीं है। यह तंबाकू के कंजप्शन को घटाने की जगह बाजार के स्ट्रक्चर को खराब करने वाला है। इससे अवैध तरीके से इसकी बिक्री में तेजी आएगी। अगर सरकार को तंबाकू पर नियंत्रण करना है, तो लगातार अवेयरनेस प्रोग्राम चलाने की जरूरत है। कोटपा बिल को मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ की तरफ से प्रस्तावित किया गया है। इसका मकसद 21 साल से कम उम्र के बच्चों को सिगरेट की बिक्री पर रोक और खुली सिगरेट की बिक्री पर नियंत्रण पाना है।



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