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कोविड ने लोगों को समझाया बीमा का महत्व, आप भी कोरोना रक्षक पॉलिसी लेकर बचाएं पैसे

नई दिल्ली । देश में एक बार फिर कोरोना वायरस का कहर टूट पड़ा है। संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। रोज करीब तीन लाख संक्रमित सामने आ रहे हैं। कोविड-19 का इलाज काफी महंगा है। इस समय देश में न सिर्फ बड़ी संख्या में कोविड-19 के मरीज बढ़ रहे हैं, बल्कि इस बीमारी से मौत भी काफी हो रही है। ऐसे में एक बार फिर लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस का महत्व समझ में आ रहा है। अक्सर ऐसी खबरें आती हैं कि कोरोना के इलाज के लिए हॉस्पिटल्स ने 8 से 10 लाख रुपए का बिल बना दिया। ऐसे में आपकी मौजूदा कॉरपोरेट पॉलिसी या व्यक्तिगत फेमिली फ्लोटर पॉलिसी इस इलाज के लिए काफी नहीं हो सकती। इसलिए आपको कोरोना कवच या कोरोना रक्षक पॉलिसी भी लेनी चाहिए। इन्हें आप महज 2 से 4 हजार रुपए में ले सकते हैं।

सिर्फ 15 दिन का ग्रेस पीरियड-
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आइआरडीएआइ) ने पिछले साल ही देश में काम कर रही सभी बीमा कंपनियों से कहा था कि वे स्टैंडर्ड कोविड-19 हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेकर आएं। इसके बाद कई कंपनियां सिर्फ कोविड-19 से जुड़ी पॉलिसी लेकर आई हैं। अच्च्छी बात यह है कि ऐसी पॉलिसीज में ग्रेस पीरियड सिर्फ 15 दिन का होता है। यानी, आप बीमा पॉलिसी लेने के 15 दिन बाद कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए तो आपको क्लेम मिलेगा। ये पॉलिसियां भी दो तरह की होती हैं-कोरोना कवच और कोरोना रक्षक पॉलिसी।

यह है कोरोना कवच-
कोरोना कवच एक स्टैंडर्ड कोविड-19 की पॉलिसी है। यह एक शॉर्ट टर्म पॉलिसी है। इसमें कोरोना वायरस के संक्रमण का उपचार किया जाता है। इसमें सम इंश्योर्ड 50 हजार से लेकर 5 लाख रुपए तक ही होता है। अच्छी बात यह है कि यह पॉलिसी शॉर्ट टर्म के लिए यानी 3.5 महीने से 9.5 महीने तक के लिए ली जा सकती है। इसके लिए प्रीमियम भी एक बार ही दिया जाता है।

यह है कोरोना रक्षक पॉलिसी-
यह एक फिक्स्ड बीमा प्लान है। कोई व्यक्ति यदि कोविड-१९ से संक्रमण का इलाज करा रहा है और वह अस्पताल में भर्ती होता है, तो बीमा कंपनी इस उपचार के लिए एक निश्चित राशि देती है। इसके तहत बीमित व्यक्ति को इलाज के लिए 50 हजार से 2.5 लाख रुपए तक की राशि दी जाती है। यह भी सिंगल प्रीमियम वाली पॉलिसी है। इसकी अवधि 3.5 महीने से लेकर 9.5 महीने के लिए होती है। उसके बाद आपको फिर से अलग पॉलिसी लेनी होगी।

आइआरडीएआइ ने दिया है निर्देश -
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आइआरडीएआइ) ने अप्रेल 2020 में ही यह निर्देश दिया था कि सभी हेल्थ बीमा उत्पाद के तहत कोविड-19 के इलाज को भी कवर किया जाएगा। मतलब कि, अगर आपके पास कोई हेल्थ इंश्योरेंस की पॉलिसी है, तो बीमा कंपनी कोविड के इलाज के लिए क्लेम देने से मना नहीं कर सकती। आम तौर पर ऐसी पॉलिसी में 24 घंटे से ज्यादा के लिए अस्पताल में भर्ती होने पर इलाज का खर्च मिलता है। कोविड केस में भी ऐसा ही होगा। लेकिन आपने यदि कोई ऐसी पॉलिसी ली है जो कैंसर, हॉर्ट डिजिज, क्रिटिकल इलनेस कवर जैसी खास स्कीम की है, तो उसमें अक्सर कोविड-19 का इलाज कवर नहीं होता।

भारत में अधिकतर लोग बीमा रहित-
क्षेत्र - प्रतिशत
शहरी - 80.9
ग्रामीण - 85.9

बड़ी कंपनियां कर रहीं कमाई-
कंपनी - हैल्थ प्रीमियम शेयर (प्रतिशत) - प्रीमियम में वार्षिक आधार पर बढ़त (प्रतिशत)
न्यू इंडिया एश्योरेंस - 18.8 - 4.8
स्टार हैल्थ इंश्योरेंस - 13.8 - 45.6
यूनाइटेड इंडिया एश्योरेंस - 11.3 - 57.9
नेशनल इंश्योरेंस - 10.2 - 2.8
ओरिएंटल इंश्योरेंस - 8.6 - 19.6
आइसीआइसीआइ लोम्बार्ड - 5 - 1.2
एचडीएफसी एर्गो हैल्थ - 3.5 - 3.4
इफको-टोक्यो - 3.4 - 28.8
(नोट: आंकड़े गत वर्ष सितंबर तक)

इन कंपनियों ने घटाया प्रीमियम-
कंपनी - हैल्थ प्रीमियम शेयर (प्रतिशत) - प्रीमियम में वार्षिक आधार पर घटत (प्रतिशत)

केयर इंश्योरेंस - 3.7 - 0.3
बजाज आलियांज - 3.5 - 14.8
(नोट: आंकड़े गत वर्ष सितंबर तक)



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