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रैंडस्टैड की रिपोर्ट : कोरोना संकट में भी नहीं जाएंगी नौकरियां

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के चलते ज्यादातर कंपनियां वर्क फ्रॉम होम का विकल्प अपना रही हैं। इसी बीच कर्मचारियों को डर सता रहा है कि कहीं पिछली बार की तरह उनकी जॉब खतरे में न पड़ जाए, लेकिन ग्लोबल ह्यूमन रिसोर्स कंपनी रैंडस्टैड इंडिया समेत अन्य कई बड़ी कंपनियों ने इस बात को खारिज किया है।

उनका कहना है टेक कंपनियों समेत दूसरे क्षेत्रों में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं, इसीलिए बड़ी कंपनियां इस बार बंपर भर्तियां निकाल रही हैं। इस बार लोगों की नौकरियां नहीं जाएंगी। इसके पीछे टेक्नोलॉजी कंपनियों में टेम्परेरी स्टाफिंग जैसे कारण अहम हैं।

हायरिंग की रफ्तार बरकरार -
रैंडस्टैड इंडिया में मैनेजिंग डायरेक्टर एंड सीईओ पॉल ड्युपुइस और सीएफओ विश्वनाथ पीएस के मुताबिक, कोरोना के मामले बढऩे के बावजूद हायरिंग की रफ्तार बरकरार रहेगी। पिछले साल अप्रेल में हायरिंग पर पूरी तरह रोक लग गई थी, लेकिन इस बार इसकी गति समान्य है। लगातार वैकेंसियां निकाली जा रही हैं।

रैंडस्टैड में हायरिंग -
ड्युपुइस का कहना है कि बिजनेस सामान्य चल रहा है। हम परमानेंट और टेम्परेरी एंप्लॉयमेंट दोनों में सभी सेक्टर्स में हायरिंग कर रहे हैं। कंपनी में लगभग 65,000 टेम्परेरी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स समेत अन्य कर्मचारी काम कर रहे हैं, लेकिन किसी भी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला।

कई क्षेत्रों में मिलेंगे भरपूर मौके-
कोरोना संकट के दौरान सबसे बुरा प्रभाव ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र पर पड़ा है। संक्रमण के डर से लोग सफर नहीं कर रहे हैं। वहीं मरीजों की संख्या बढऩे से मेडिकल क्षेत्र की बुरी हालत है। ऐसे में इन दोनों सेक्टर्स को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों में आगे बढऩे की काफी संभावनाएं हैं। कंपनियां मान रही हैं कि डिजिटल तौर पर मौजूदगी अहम है। इसके चलते डिजिटल में निवेश किया जा रहा है। टेक्नोलॉजी कंपनियों के अलावा एजुकेशन, फार्मास्युटिकल, हेल्थकेयर और इंश्योरेंस सेक्टर में भी बंपर हायरिंग हो रही है।



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