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बैंक लॉकर से कीमती सामान की चोरी होने पर अब बैंकों को देना होगा मुआवजा

नई दिल्ली। बैंक के लॉकर में रखे गहने या अन्य कीमती सामान की चोरी होने पर अब बैंक को मुआवजा देना होगा। परन्तु यदि किसी प्राकृतिक आपदा के कारण बैंक लॉकर में रखे सामान को नुकसान पहुंचता है तो उसकी जिम्मेदारी ग्राहक को उठानी होगी। भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंक लॉकर संबंधी दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है। इसमें बैंकों के लिए मुआवजा नीति और देनदारी का विस्तार से जिक्र किया गया है।

रिजर्व बैंक के अनुसार बैंकों को अपने बोर्ड से मंजूर ऐसी नीति लागू करनी होगी, जिसमें लापरवाही की वजह से लॉकर में रखे सामान की चोरी पर जिम्मेदारी तय की जा सके। शीर्ष बैंक ने कहा है कि प्राकृतिक आपदा या 'एक्ट ऑफ गॉड' (भूकंप, बाढ़, आकाशीय बिजली या आंधी-तूफान) के मामलों में बैंक किसी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। हालांकि बैंकों को अपने परिसर को इस तरह की आपदाओं से बचाने के लिए उचित इंतजाम करने होंगे।

आरबीआई ने कहा है कि जिस परिसर में सुरक्षित जमा लॉकर हैं, उसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी बैंक की होगी। निर्देश में कहा गया है कि आग, चोरी, डकैती या सेंधमारी की हालत में बैंक अपने दायित्व से नहीं हट सकता। ऐसे मामलों में बैंक का दायित्व लॉकर के वार्षिक किराए का सौ गुना तक होगा। बैंकों को लॉकर करार में यह प्रावधान भी शामिल करना होगा कि लॉकर किराए पर लेने वाला व्यक्ति उसमें गैरकानूनी या खतरनाक सामान नहीं रख सकता है।

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खाली लॉकर्स की सूची बनानी होगी
आरबीआई ने कहा कि बैंकों को शाखावार खाली लॉकरों की सूची बनानी होगी। उन्हें लॉकरों के आवंटन के लिए प्रतीक्षा सूची की जानकारी कोर बैंकिंग प्रणाली (CBS) या साइबर सुरक्षा ढांचे की अन्य कम्प्यूटीकृत प्रणाली में डालनी होगी।

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