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क्या अपने भी किसी तरह का लोन ले रखा है? तो अपनाए ये ट्रिक, EMI ka बोझ होगा कम और होगी अच्छी बचत

नई दिल्ली. आज के वक्त में लगभग हर व्यक्ति ने किसी न किसी तरह का लोन ले रखा है, चाहें कार खरीदना हो या घर लेना हो, वेकेशन प्लान करना हो या फिर मोबाइल, लैपटॉप समेत कुछ भी लग्जरी सामान खरीदना हो। क्रेडिट कार्ड और लोन की मदद से सारा काम आसानी से हो जाता है, लेकिन ईएमआई का बोझ काफी बढ़ जाता है। ऐसे में आपके लिए यह जानना जरूरी है कि ईएमआई के चक्कर में आपको कितनी अधिक राशि चुकानी पड़ती है, लेकिन क्या आप जानते है की ईएमआई के इस बोझ को कैसे कम किया जा सकता है।

पैसे की बचत के लिए जरूरत है तो सिर्फ सही प्लानिंग की। जब आप किसी तरह का लोन लेते हैं तो EMI का बारिकी से अध्ययन करें। इस दौरान आप पाएंगे कि ईएमआई अमाउंट दो हिस्सों में बंटा होता है। एक हिस्सा इंट्रेस्ट रीपेमेंट होता है, जबकि दूसरा हिस्सा प्रिंसिपल अमाउंट रीपेमेंट का होता है।

शुरुआत में किसी भी लोन के लिए ईएमआई चुकाने पर ज्यादा हिस्सा इंट्रेस्ट के रूप में जाता है, जबकि थोड़ा हिस्सा प्रिंसिपल अमाउंट को चुकाने में जाता है। धीरे-धीरे लोन पुराना होता है और ईएमआई में ज्यादा हिस्सा प्रिंसिपल अमाउंट रीपेमेंट के लिए जाता है, जबकि इंट्रेस्ट रीपेमेंट अमाउंट में कमी आती है।

अगर चुकाना है कम इंटरेस्ट:
EMI का कितना हिस्सा प्रिंसिपल अमाउंट रीपेमेंट में जमा होगा और कितना हिस्सा इंट्रेस्ट रीपेमेंट में जमा होगा यह आपके लोन टेन्योर पर निर्भर करता है। ऐसे में अगर आप इंट्रेस्ट के रूप में कम भुगतान करना चाहते हैं तो लोन का टेन्योर कम से कम रखें, इससे ईएमआई जरूर बढ़ेगी लेकिन आपके सेविंग बहुत ज्यादा होगा।


EMI अमाउंट हर साल बढ़ाएं:
अगर आपके लिए लोन टेन्योर को कम करना मुश्किल है, क्योंकि इससे ईएमआई का बोझ काफी बढ़ जाता है तो आपके पास दो ऑप्शन हैं, जिनका इस्तेमाल किया जा सकता है। पहला विकल्प ये है कि आप हर साल एक ईएमआई एक्स्ट्रा जमा करें, मतलब, 12 महीने में 13 ईएमआई जमा करें. दूसरा विकल्प ये है कि हर साल आप ईएमआई को 2 फीसदी से बढ़ाए। वक्त के साथ आपकी इनकम जैसे-जैसे बढ़ती जाती है, आप हर साल उस हिसाब से ईएमआई अमाउंट को बढ़ाते जाएं, इन दो ट्रिक की मदद से आप लाखों रुपए तक बचा सकते हैं।



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